INDIA - Patrika


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INDIA
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रतलाम/जावरा।. परंपरा, संस्कार और वेशभूषा के साथ हमें हमारे परिवेश का ध्यान रखना होगा। अभिभावक भी बेटी को चांद का टूकड़ा बनाने के बजाए तपता सूर्य बनाए। हमारी बहन, बेटियों को हमें पद्मिनी बनाना होगा। हमारी पहचान ही प्राचीन परंपरा और संस्कारों के साथ भारतीय संस्कृति से है। विश्व को ज्ञान देने वाले हमारे देश की संस्कृति को विदेशों ने अपनाएं है और हमारें समाज में विदेशी संस्कृति का प्रचलन बढ़ता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। भारत माता को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए हम सभी को एक होना होगा। भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए हर एक को अपनी भूमिका निभाना होगी।


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