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जूतियों का सामान
Jansatta जूतियों के नए फैशन के बारे में बता रही हैं अनुजा भट्ट। जूतियां भारत की देन हैं। जब पांव में पहनने के लिए किसी चीज की जरूरत महसूस हुई तो सबसे पहले खड़ाऊं और फिर जूतियां चलन में आर्इं। ये दोनों ही चीजें घर पर बनाई जाती थीं। अब भी महिलाएं घर पर जूतियां बनाती हैं। पर जब हम फैशन की बात करते हैं तो हर दौर में फैशन की अपनी एक चाल-ढाल होती है। बात सिर्फ पहनावे तक सिमटी नहीं रहती। हमारा ध्यान सबकी चाल पर भी जाता है। इसलिए बदलाव की गुंजाइश वहां भी उतनी ही होती है, जितनी आधुनिक डिजाइन पर। तो फैशन के कद्रदानो, आपको इस बार हाई हिल के जूते-सैंडल से तौबा करना होगा और अपनानी होंगी समतल ... |
जूतियों का सामान - Jansatta
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