फैशन - अमर उजाला


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मेरे अल्फाज़. फैशन. Ashok Chaturvedi. 14 कविताएं. +. Like It. AddThis Sharing Buttons. Share to Facebook Share to Twitter Share to WhatsApp Share to Email Share to Pinterest. फैशन आई फैशन आई नहीं रहे अब बहू शर्मायी घर घर होती रोज लड़ाई फैशन आई फैशन आई फैशन ने किया है जग का सत्यानाश स्कर्ट टॉप में है बहू सर ढाँपे है सास सर ढांपे है सास नहीं कुछ कह पती है यदि कहे कुछ तो बहू गुस्से में आती है गुस्सा जब चढ़ जाता है आसमान पर सात नहीं किसी को चैन तब दिन रहे या रात दिन रहे या रात नयी नयी गली खामें इडियट, नॉनसेंस या ब्लडीफूल कहामें ये गाली भी हैं यहां फैशन की ही देन फैशन में ही लग रहे नवयुवकों के ब्रेन फैशन का हटाना है भारत में से राज फैशन की जरुरत नहीं भारत को है आज करें वही हम यतन ये ...

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